Stock Market: बाजार खुलते ही निवेशकों के डूबे 3.5 लाख करोड़, सेंसेक्‍स 500 अंक टूटा, ये हैं टॉप लूजर्स

Margin Trading- मार्जिन ट्रेडिंग

मार्जिन ट्रेडिंग
What is Margin Trading: शेयर बाजार में मार्जिन ट्रेडिंग से अर्थ उस प्रक्रिया से है, जहां व्यक्तिगत निवेशक शेयर खरीद की अपनी क्षमता से ज्यादा स्टॉक्स खरीदते हैं। मार्जिन ट्रेडिंग भारत में इंट्रा डे ट्रेडिंग को भी परिभाषित करती है। मार्जिन ट्रेडिंग की सुविधा विभिन्न स्टॉक ब्रोकर्स देते हैं। डिलीवरी ट्रेडिंग क्या है मार्जिन ट्रेडिंग में एक सिंगल सेशन में सिक्योरिटीज की खरीद और बिक्री शामिल रहती है। समय के साथ विभिन्न ब्रोकरेजेस ने टाइम ड्यूरेशन के मामले में कुछ ढील दी है। मार्जिन ट्रेडिंग में निवेशक एक विशेष सत्र में शेयर की चाल का अनुमान लगाते हैं। इलेक्ट्रॉनिक स्टॉक एक्सचेंजेस की बदौलत, मार्जिन ट्रेडिंग अब छोटे ट्रेडर्स के लिए भी एक्सेसिबल है। मार्जिन ट्रेडिंग की प्रक्रिया काफी सरल है।

मार्जिन अकाउंट, निवेशकों को अपनी शेयर खरीद क्षमता से ज्यादा शेयर खरीदने के संसाधन उपलब्ध कराता है। इस उद्देश्य के लिए ब्रोकर शेयर खरीदने के लिए पैसे उधार देता है और शेयरों को अपने पास गिरवीं रख लेता है। मार्जिन अकाउंट के साथ ट्रेड करने के लिए निवेशक को सबसे पहले मार्जिन अकाउंट खुलवाने के लिए अपने ब्रोकस को रिक्वेस्ट करनी होती है। इसके लिए ब्रोकर को कैश में पैसे देने होते हैं, जिसे मिनिमम मार्जिन कहते हैं।

डिलीवरी ट्रेडिंग क्या है

डिलीवरी-आधारित ट्रेड्स के लिए आपसे कोई ब्रोकरेज चार्ज नहीं लिया जाएगा।

डिलीवरी आधारित ट्रेड्स में वे सभी ट्रेड शामिल होते हैं जिनमें आप एक दिन से ज़्यादा समय तक स्टॉक होल्ड करते हैं। हालाँकि, अगर आप CNC का इस्तेमाल करके कोई स्क्रिप खरीदतें है और उसे उसी दिन बेच देतें है, तब इस तरह के ट्रेड को इंट्राडे माना जाता है और इसमें इंट्राडे ब्रोकरेज अप्लाई होता है।

इक्विटी इंट्राडे ट्रेडों के लिए आपसे टर्नओवर का 0.03% या Rs 20 प्रति एक्सेक्यूटेड आर्डर, जो भी कम हो वह लिया जाएगा।

टर्नओवर = नंबर ऑफ़ शेयर्स * शेयर की प्राइस

किसी ख़ास ट्रेड से संबंधित सभी चार्जेस के बारें में जानने के लिए आप हमारे ब्रोकरेज कैलकुलेटर पर जा सकते हैं।


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Intraday Trading Vs Delivery Trading: जानें इंट्राडे तथा डिलीवरी ट्रेडिंग में क्या अंतर है

Intraday Trading Vs Delivery Trading

शेयर मार्केट में निवेश करना वर्तमान दौर में बेहद आसान बनता जा रहा है, लेकिन यहाँ निवेश करने के एक से अधिक विकल्प उपलब्ध हैं, जिनके बारे में एक निवेशक के तौर पर आपके लिए जानना आवश्यक है। उदाहरण के लिए कुछ शेयर मार्केट ट्रेडिंग अल्पकालिक अवधि के लिए होती हैं, जबकि कुछ ट्रेडिंग लंबी अवधि के निवेश के रूप में की जाती हैं।

हालाँकि शेयर बाज़ार में निवेश के कुछ अन्य तरीके भी हैं जैसे फ्यूचर एवं ऑप्शन में निवेश आदि, किन्तु आज इस लेख में हम मुख्यतः अवधि के आधार पर शेयर मार्केट में करी जाने वाली ट्रेडिंग के विषय में समझेंगे। इस प्रकार शेयर बाजार में दो तरीके से ट्रेडिंग करी जा सकती हैं, जिन्हें हम इंट्राडे ट्रेडिंग या डिलीवरी आधारित ट्रेडिंग (Intraday Trading Vs Delivery Trading) के रूप में जानते हैं।

इंट्राडे ट्रेडिंग (Intraday Trading) क्या है?

जब कोई ट्रेडर या निवेशक एक ही ट्रेडिंग दिन के भीतर शेयरों की खरीद और बिक्री करता है, तो इसे इंट्राडे ट्रेडिंग (डिलीवरी ट्रेडिंग क्या है Intraday Trading) कहा जाता है। इस प्रकार की ट्रेडिंग में शेयरों को कम समय में लाभ कमाने के उद्देश्य डिलीवरी ट्रेडिंग क्या है से खरीदा जाता है, लंबी अवधि के निवेश के रूप में नहीं।

इंट्राडे ट्रेडिंग में किसी ट्रेडिंग दिन में शेयर की कीमत में हुए परिवर्तन के आधार पर ट्रेडर लाभ अर्जित करते हैं, गौरतलब है कि, डिलीवरी ट्रेडिंग के विपरीत यहाँ कोई ट्रेडर किसी शेयर को पहले बेचकर बाद में खरीद भी सकते हैं। ऐसा उस स्थिति में किया जाता है, जब ट्रेडर को किसी शेयर की कीमतों में गिरावट का अंदेशा होता है, ऐसे में ट्रेडर दिन की शुरुआत में शेयर बेच देते हैं तथा दिन के मध्य या अंत में जब शेयर के दाम गिर जाएं तो उसे खरीद लेते हैं।

Stock Market Trading: इन तरीकों से बढ़ा सकते हैं स्टॉक मार्केट से कमाई, जानिए कैसे घट जाता है वास्तविक मुनाफा

Stock Market Trading: इन तरीकों से बढ़ा सकते हैं स्टॉक मार्केट से कमाई, जानिए कैसे घट जाता है वास्तविक मुनाफा

स्टॉक मार्केट में जब आप पैसे लगाते हैं तो ब्रोकरेज, एसटीटी (सिक्योरिटी ट्रांजैक्शन फीस), एक्सचेंज ट्रांजैक्शन चार्ज, जीएसटी, सेबी चार्ज, स्टांप ड्यूटी जैसे टैक्स व चार्जेज चुकाने होते हैं और इन्हें काटकर ही शुद्ध मुनाफा या नुकसान आपको हासिल होता है. (Image- Pixabay)

Stock Market Trading: अगर आप स्टॉक मार्केट में कारोबार करते हैं और शेयरों की सक्रिय रूप से खरीद-बिक्री करते हैं तो इससे जुड़े चार्जेज के बारे में पहले से कैलकुलेशन कर लेना चाहिए. यह कैलकुलेशन इसलिए जरूरी है क्योंकि इससे मुनाफा बढ़ाने में मदद मिलती है. इक्विटी में जब आप पैसे लगाते हैं तो यह इंट्रा-डे होता है या डिलीवरी या फ्यूचर या ऑप्शंस, इन सभी तरीकों में पैसे लगाने पर मुनाफा अलग-अलग हासिल होता है. स्टॉक मार्केट में जब आप पैसे लगाते हैं तो ब्रोकरेज, एसटीटी (सिक्योरिटी ट्रांजैक्शन फीस), एक्सचेंज ट्रांजैक्शन चार्ज, जीएसटी, सेबी चार्ज, स्टांप ड्यूटी जैसे टैक्स व चार्जेज चुकाने होते हैं और इन्हें काटकर ही शुद्ध मुनाफा या नुकसान आपको हासिल होता है.

इन चार तरीकों से होती है ट्रेडिंग

  • Intra-Day Equity: जब आप शेयर की खरीद-बिक्री यानी लांग या शॉर्ट पोजिशन सिर्फ एक ही दिन के लिए लेते हैं यानी कि आज ही खरीदकर बेच दिया तो यह इंट्रा-डे के तहत माना जाता है. इसमें इक्विटी की होल्डिंग नहीं मिलती है.
  • Delivery Equity: इंट्रा-डे के विपरीत डिलीवरी ट्रेडिंग में आप जो शेयर खरीदते हैं, उसे डीमैट खाते में रखा जाता है और इसकी होल्डिंग कुछ समय के लिए मिलती है. इंट्रा-डे में चाहे घाटा हो या फायदा, पोजिशन को स्क्वॉयर ऑफ करना जरूरी होता है, जबकि डिलीवरी इक्विटी ट्रेडिंग में अपने हिसाब से जब चाहें किसी भी कारोबारी समय पर शेयरों की बिक्री कर सकते हैं.
  • Future: यह खरीदार और विक्रेता के बीच एक वायदा है जिसके तहत एक खास दिन निश्चित प्राइस पर स्टॉक्स का लेन-देन होता है. सौदा हो जाने के बाद दोनों ही पार्टियों को इस सौदे को पूरा करना अनिवार्य है और कोई भी पक्ष मुकर नहीं सकता है.
  • Options: ऑप्शंस के तहत किसी खास दिन निश्चित प्राइस पर लेन-देन के लिए एक सौदा होता है जिसमें कुछ प्रीमियम चुकाना होता है. ऑप्शंस के तहत कॉल और पुट दो विकल्प मिलते हैं. कॉल ऑप्शंस के तहत खरीदार को खरीदने का अधिकार मिलता है और पुट ऑप्शंस के तहत बेचने का.

मुनाफे पर ऐसे पड़ता है असर

ऊपर चार तरीकों के बारे में जानकारी दी गई जिससे आप शेयर मार्केट के जरिए पैसे कमाते हैं. अब नीचे देखते हैं कि आपको सभी तरीके से कितना मुनाफा हो रहा है-

  • मान लेते हैं कि आप किसी कंपनी के 1 हजार रुपये के 400 शेयरों को खरीदकर इंट्रा-डे में ही 1100 रुपये में बेच देते हैं तो कुल टर्नओवर 8.40 लाख रुपये का हुआ. इस पर ब्रोकरेज, एसटीटी, एक्सचेंज ट्रांजैक्शन फीस, जीएसटी, सेबी शुल्क और स्टांप ड्यूटी मिलाकर करीब 202.24 रुपये टैक्स व चार्जेज के रूप में चुकाने होंगे. इस ट्रेडिंग में आपको 39795.76 रुपये का मुनाफा होगा.
  • अगर आप 1 हजार रुपये के 400 शेयरों को खरीदकर डिलीवरी लेते हैं यानी कि उनकी बिक्री किसी और दिन 1100 रुपये के भाव पर करते हैं तो कुल टर्नओवर 8.40 लाख रुपये का हुआ लेकिन टैक्सेज व चार्जेज के रूप में 935.04 रुपये चुकाने होंगे. इसमें 39064.96 रुपये का मुनाफा हुआ जो इंट्रा-डे ट्रेडिंग से कम है. हालांकि इंट्रा-डे में बहुत रिस्क है क्योंकि इसमें मुनाफा हो या नुकसान, पोजिशन को स्क्वॉयर ऑफ करना ही होगा.

What is Delivery Margin in Zerodha in Hindi? | ज़ेरोधा में डिलीवरी मार्जिन क्या है?

अगर आपके फंड्स आपको डिलीवरी ट्रेडिंग के तहत आप की पसंद के स्टॉक में निवेश करने के लिए परेशान हैं तो अब आप को इस समस्या से परेशान होने की जरूरत नहीं है। क्योंकि इसलिए आप अब आप डिलीवरी ट्रेडिंग के लिए मार्जिन को कम करके ज्यादा से ज्यादा ट्रेड सकते हैं।

लेकिन ट्रेड करने से पहले हमें डिलीवरी मार्जिन (delivery margin kya hai) के बारे में भी जानकारी होनी चाहिए। डिलीवरी मार्जिन (Delivery margin kaise kaam karta hai) काम कैसे करता है?

मार्जिन (What is delivery margin in Hindi) का मतलब लीवरेज या फिर फंड होता है जो किसी भी ब्रोकर द्वारा ट्रेडर को ज्यादा से ज्यादा ट्रेडिंग करने के लिए प्रदान किया जाता है। वैसे डिलीवरी ट्रेडिंग क्या है तो आमतौर पर यहीं होता है कि मार्जिन की सुविधाएं ब्रोकर इंट्राडे के लिए ही प्रदान की जाती है, लेकिन कुछ परिस्थिति में यह अपवाद भी होता है क्योंकि कुछ ब्रोकर ऐसे भी होते हैं जो डिलीवरी ट्रेडिंग के लिए भी लीवरेज प्रदान करते हैं।

What is Delivery Margin in Zerodha in Hindi?

अब आगे हम जानते हैं कि जेरोधा में डिलीवरी मार्जिन क्या है?

आगे बढ़ने से पहले हम यहां जेरोधा के बारे में भी आपको शॉर्ट में इंफॉर्मेशन दे रहे हैं।

जीरोधा (Zerodha Meaning in Hindi) की स्थापना साल 2010 में निखिल कामत डिलीवरी ट्रेडिंग क्या है और नितिन कामत ने मिलकर की थी। अब नितिन कामत जेरोधा के फाउंडर और सीईओ है।

सब-ब्रोकर के रूप में डिलीवरी ट्रेडिंग क्या है अपना करियर शुरू करने वाले नितिन कामत ने साल 2006 में रिलायंस के साथ मनी मैनेजर के तौर पर काम किया और साल 2010 के अंत तक अपने छोटे भाई के साथ मिलकर जेरोधा की स्थापना कर दी।

यह सब तो जीरोधा (Zerodha Meaning in Hindi) दो शब्दों को मिलाकर बनाया गया है जीरो + रोढा (Zero+ Rodha)। इसका मतलब है कि इस कंपनी में किसी भी ट्रेडर इन्वेस्टर्स को किसी भी प्रकार की बाधाएं नहीं आती है।

Zerodha हमारे देश की पहली ऐसी डिस्काउंट ब्रोकरेज फर्म है जिसने देश की ब्रोकिंग इंडस्ट्री का परिदृश्य बदल दिया है। वही Zerodha हमारे देश का ऐसा पहला ट्रेडिंग फर्म है जो मौजूदा ब्रोकरेज की रेट्स कम करके हर खरीद और बिक्री बिक्री पर फ्लैट दर से फीस की फैसिलिटी भी प्रदान करता है। साथ ही यह बीएसई , सेबी, एमसीएक्स , में एनसीडीईएक्स और एनएसई जैसे एक्सचेंज के साथ भी पंजीकृत है।

Delivery Margin in Zerodha in Hindi

जेरोधा में डिलीवरी मार्जिन क्या है इसे हम एक बहुत ही आसान तौर पर आप को डिलीवरी ट्रेडिंग क्या है समझा रहे हैं।

चलिए मान लीजिए कि आपके पास किसी भी कंपनी का एक शेयर है जिसे आप 550.50 डिलीवरी ट्रेडिंग क्या है रुपए में बेचना चाहते हैं।

अब इन संजोग में आपके ट्रेडिंग अकाउंट में T+1 डे में इसका 80% यानी 440.4 का अमाउंट क्रेडिट हो जाएगा और बाकी का 20% यानी कि 110.1 अमाउंट आपके अकाउंट में डिलीवरी ट्रेडिंग क्या है मार्जिन के तौर पर अवेलेबल होगा जिसे आप अपनी नेक्स्ट ट्रेड के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं।

वहीं आप ऑप्शन डिलीवरी ट्रेडिंग क्या है और फ्यूचर में ट्रेड कर रहे हैं और फिजिकल डिलीवरी की स्थिति भी ओपन है तो ऐसी परिस्थिति में आप का अतिरिक्त मार्जिन ब्लॉक हो जाएगा और इस अतिरिक्त मार्जिन को भी हम डिलीवरी मार्जिन की जैसे ही टैग करते हैं।

यहां पर कुछ ऐसी परिस्थितियां भी है जिनके बारे में आपको जानकारी होना बेहद ही जरूरी है।

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