गोल्ड में निवेश करना फायदेमंद माना जाता है। (Photo-Indian Express )

योजना परिवर्तन पर लगाया जाने वाला कर

किसी म्युचुअल फंड योजना की ग्रोथ और लाभांश विकल्प दो अलग-अलग योजनाएं होती हैं और इनके शुध्द परिसंपत्ति मूल्य (एनएवी) भी भिन्न-भिन्न होते हैं। अगर आपने लाभांश विकल्प को छोड़ कर ग्रोथ विकल्प का चयन किया है तो वास्तव में यह इंटर-स्कीम ट्रांसफर है, जिसे ग्रोथ विकल्प में ट्रांसफर के दिन के एनएवी के आधार पर नये निवेश के रुप में देखा जाता है।

यह लेन-देन किसी लांभांश विकल्प में से सारे पैसे निकाल कर किसी योजना के ग्रोथ विकल्प में निवेश करने जैसा है। अगर किसी इक्विटी फंड में आप अपना निवेश एक साल तक बनाए रखते हैं तो कर की जिम्मेदारी नहीं बनती है। चूंकि आपने एक साल से अधिक अवधि तक अपना निवेश बनाए रखा था इसलिए भुना कर ग्रोथ स्कीम में निवेशित की गई राशि पर कर नहीं लगाया जाएगा (सिक्योरिटी ट्रांजैक्शन टैक्स आपको पैसे देने से पहले ही काट लेती है)।

ट्रांसफर के दो महीने बाद ही आपने अपने यूनिट भुना लिया है इसलिए आपको अल्पावधि का पूंजीगत लाभ कर अदा करना होगा जो 15 प्रतिशत की दर से लाभ पर लगाया जाता है। इस बात का खुलासा आपको वित्त वर्ष के अंत में अपने आयकर रिटर्न भी दिखाना होगा।

कृपया कुछ पांच सितारा रेटिंग वाले अच्छे फंडों के बारे में बताएं। कुछ अच्छी रेटिंग वाले फंडों में मैं 20,000 रुपये प्रति माह निवेश करना चाहता हूं जो मुझे कम से कम 15 प्रतिशत का वार्षिक प्रतिफल दे। मेरी उम्र 55 साल है और मेरी नौकरी अभी दस साल और बची हुई है। -डॉ. अशोक एम पाटिल

किसी विशाखित फंड से 15 प्रतिशत वार्षिक प्रतिफल पाने की उम्मीद करना जायज है। लेकिन हमेशा की तरह फंड के चुनाव का तरीका सर्वाधिक महत्वपूर्ण है। सबसे पहले अपनी जोखिम उठाने की क्षमता देखते हुए इक्विटी और ऋण में निवेश के आवंटन का एक आदर्श तय कर लें जिसे आप भविष्य में बनाए रखना चाहेंगे। उसके बाद फंडों के पिछले तीन से पांच साल के ट्रैक रिकॉर्ड को देखें। फंड की रेटिंग सही फंड के चयन में आपकी मदद करती है।

सेवानिवृत्त होने में अभी 10 साल बाकी है इसलिए आप लार्ज कैप की तरफ अधिक झुकाव वाले, अच्छी रेटिंग वाले इक्विटी विशाखित फंडों में निवेश कर सकते हैं क्योंकि इनमें मिड और स्मॉल-कैप फंडों की तुलना में अधिक स्थिरता होती है। अपने पोर्टफोलियो में एक निश्चित मात्रा में ऋण बनाए रखने के लिए आपको बैलेंस्ड फंडों में भी निवेश करना चाहिए।

सिप की शुरुआत करते समय यह सुनिश्चित कर लें कि आप चार से अधिक फंडों में 20,000 रुपये की कुल राशि का निवेश नहीं करेंगे (प्रत्येक फंड में 5,000 रुपये)। समय के साथ बनते कोष की सुरक्षा के लिए सेवानिवृत्ति से तीन साल पहले आप घीरे-धीरे अपनी परिसंपत्ति इक्विटी से ऋण में ट्रांसफर कर सकते हैं (अगर सेवानिवृत्ति के बाद आपको इस कोष की जरुरत है)।

सुझाए गए फंडों में एचडीएफसी टॉप 200, एचडीएफसी प्रूडेंस, बिड़ला फ्रंटलाइन इक्विटी, डीएसपी मेरिल लिंच टाइगर बैलेंस्ड, सुंदरम सेलेक्ट फोकस और मैग्नम बैलेंस्ड शामिल हैं।

किसी फंड की प्रबंधनाधीन परिसंपत्ति की गणना किस प्रकार की जाती है? इस साल मार्च महीने के अंत में मैं रिलायंस टैक्स सेवर की शुध्द प्ररिसंपत्ति देख कर उलझ गया हूं। फरवरी 2008 में इसकी शुध्द परिसंपत्ति आपको ETF में निवेश क्यों करना चाहिए लगभग 2,111 करोड़ रुपये थी जो मार्च 2008 के अंत में घट कर लगभग 1,882 करोड़ रुस्पये हो गई। यह एक टैक्स सेवर फंड है इसलिए तीन साल से पहले इस योजना के यूनिटों को भुनाया भी नहीं जा सकता है, तो फिर इस फंड के आकार में कमी क्यों आई? -अचंत कृष्णशर्मा

किसी फंड की प्रबंधनाधीन परिसंपत्ति (एयूएम) की घोषणा प्रत्येक महीने की जाती है। एयूएम पोर्टफोलियो का कुल मूल्य होता है जो घोषण के दिन निवेशित होता है। सामान्य शब्दों में कहें तो एनएवी और यूनिटों की कुल संख्या को गुणा कर प्राप्त संख्या एयूएम होती है। इसलिए एयूएम में शेयर की कीमतों में आपको ETF में निवेश क्यों करना चाहिए होने वाले उतार-चढ़ाव, यूनिटों के भुनाने और अतिरिक्त खरीदारी से भी उतार-चढ़ाव आते हैं।

मार्च महीने में रिलायंस टैक्स सेवर सबसे खराब प्रदर्शन करने वाले फंडों में शामिल था। इस महीने के दौरान फंड के एनएवी में 15.54 प्रतिशत की गिरावट आई। परिसंपत्ति मूल्य के घटने से इसके एयूएम में भी गिरावट आई और उसकी प्रतिशतता समान थी।

ऐसे उतार-चढ़ाव तब और अधिक होते हैं जब मंदी के दिनों में किसी फंड पर यूनिट भुनाने का दबाव बनता है। सितंबर 2008 में यह फंउ अपना तीसरा वर्ष पूर्ण कर रहा है इसलिए जिन निवेशकों ने फंड के शुरुआत में अपना निवेश किया था, वे अपने यूनिटों को भुना सकते हैं।

मैं सोने में निवेश करने की योजना बना रहा हूं लेकिन यह निर्णय नहीं कर पा रहा कि मुझे गोल्ड ईटीएफ में निवेश करना चाहिए या फिर भौतिक सोने में। कृपया कुछ ईटीएफ और गोल्ड फंडों के बारे में बताइए। मैं लगभग एक लाख रुपये का निवेश करना चाहता हूं। -राघवेन्द्र रामाराओ

वैश्विक स्तर पर सोने की बढ़ती कीमतों से देर से ही सही लेकिन इस परिसंपत्ति वर्ग के निवेशकों को लाभ हुआ है। गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंडों (ईटीएफ), जिनमें से अधिकांश पिछले वर्ष लॉन्च किए गए हैं, से भौतिक सोने में निवेश करना आसान हो गया है।

सोने में सीधे तोर पर किए जाने वाले निवेश से तुलना करें तो ईटीएफ के कई लाभ हैं।ऐसे फंडों के यूनिटों का कारोबार मान्यता प्राप्त स्टॉक एक्सचेंजों में किया जाता है, इसके साथ वेल्थ टैक्स की जिम्मेदारी भी नहीं जुड़ी होती है। इक्विटी बैंकिंग के बाद गोल्ड ईटीएफ दूसरा सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाला फंड बन कर उभरा है, इसने 26.62 प्रतिशत का प्रतिफल दिया है (16 अप्रैल 2008 के अनुसार)। फिलहाल बाजार में छह गोल्ड ईटीएफ फंड हैं जिनमें से केवल दो फंडों के एक साल से अधिक अवधि के प्रदर्शन का इतिहास है।

16 अप्रैल को यूटीआई गोल्ड ईटीएफ और गोल्ड बेंचमार्क ईटीएफ ने क्रमश: 26.66 और 26.58 प्रतिशत का प्रतिफल दिया था। डीएसपी मेरिल लिंच वर्ल्ड गोल्ड फंड जो अंतरराष्ट्रीय गोल्ड माइनिंग कंपनियों में निवेश करता है, आपके निवेश के लिए एक दूसरा विकल्प हो सकता है। पिछले नौ महीनों में इस फंड ने 45 प्रतिशत का प्रतिफल दिया है। टाटा एआईजी म्युचुअल फंड भी इसी प्रकार का एक फंड लॉन्च करने वाली है।

अक्षय तृतीया पर जरूर करें गोल्ड में निवेश, पूंजी नहीं है तो भी हैं रास्ते

दिनेश अग्रहरि

आज यानी 14 मई को अक्षय तृतीया है. आज के दिन गोल्ड में निवेश करना काफी शुभ माना जाता है. आज के दिन आपको गोल्ड में कुछ न कुछ निवेश जरूर करना चाहिए. इसके लिए अगर आपके पास ज्यादा पूंजी नहीं है तो भी चिंता की बात नहीं, हम आपको ऐसे तरीके बताते हैं जिनसे आप 1 रुपये से भी गोल्ड में निवेश की शुरुआत कर सकते हैं.

घर बैठे गोल्ड में निवेश

​स्मार्टफोन से निवेश: आप अपने स्मार्टफोन से घर बैठे गोल्ड में निवेश कर सकते हैं. यह बहुत आसान है और महज 1 रुपये से भी इसकी शुरुआत की जा सकती है. पेटीएम, गूगल पे, एमेजॉन पे, फोनपे और मोबिक्विक जैसे प्लेटफॉर्म से यह निवेश आसानी से किया जा सकता है. Paytm अपने सब्सक्राइबर को सिर्फ 1 रुपये जैसी मामूली रकम से सोने में निवेश की सुविधा दे रहा है. इसी तरह गूगल पे पर भी आप न्यूनतम 201 रुपये निवेश की शुरुआत कर सकते हैं. यह बहुत ही आसान और सहज तरीका है. इसमें आपको फिजिकल गोल्ड नहीं मिलता, लेकिन रेट में बदलाव पर उसी अनुरूप रिटर्न मिलता जाता है. हालांकि यदि आप कॉइन में निवेश करते हैं तो उसकी आपको फिजिकल डिलिवरी भी की जा सकती है.

म्यूचुअल फंड के जरिये भी गोल्ड में निवेश

गोल्ड म्यूचुअल फंड्स: आप म्यूचुअल फंड के जरिये भी गोल्ड में निवेश कर सकते हैं. बाजार में कई गोल्ड म्यूचुअल फंड्स है, जो गोल्ड ईटीएफ में निवेश करते हैं. जैसे-जैसे गोल्ड की प्राइस घटती-बढ़ती है. आपका निवेश भी उसी हिसाब से घटता-बढ़ता है. आप सीधे ऑनलाइन मोड या किसी म्यूचुअल फंड डिस्ट्रीब्यूटर्स के माध्यम से गोल्ड म्यूचुअल फंड में निवेश आपको ETF में निवेश क्यों करना चाहिए कर सकते हैं.

सोने को शेयरों की तरह खरीद-फरोख्त की सुविधा

गोल्ड ईटीएफ: ईटीएफ का मतलब होता है एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स. सोने को शेयरों की तरह खरीद-फरोख्त की सुविधा को गोल्ड ईटीएफ कहते हैं. यह भी म्यूचुअल फंडों की ही स्कीम होती है. इनकी शेयर यानी स्टॉक एक्सचेंजों पर खरीदा और बेचा जा सकता है. गोल्ड ईटीएफ खरीदने के लिए आपके पास एक ट्रेडिंग डीमैट खाता होना चाहिए. इसमें सोने की खरीद यूनिट में की जाती है. इसे बेचने पर आपको सोना नहीं बल्कि उस समय गोल्ड के बाजार मूल्य के बराबर राशि मिलती है.

पुराना और परंपरागत तरीका

फिजिकल गोल्ड: गोल्ड खरीदने का सबसे पुराना और परंपरागत तरीका फिजिकल गोल्ड खरीदने का ही है. इसका फायदा यह होता है कि इसमें आपको फिजिकली सोना अपने घर लाने को मिलता है, इसलिए एक तरह की संतुष्टि एवं खुशी होती है. अगर बाद में आपको ज्वैलरी आपको ETF में निवेश क्यों करना चाहिए आदि बनवाने के लिए गोल्ड की जरूरत है तो यह उसके भी काम आता है. फिजिकल गोल्ड में निवेश आप ज्वैलरी, बार, कॉइन किसी रूप में कर सकते हैं. लेकिन यह बात ध्यान रखनी चाहिए कि ज्वैलरी की कीमत का काफी बड़ा हिस्सा उसकी मेकिंग चार्ज का होता है, जो बेचने पर आपको नहीं मिलता.

मई के महीने में Gold ETF में 57 फीसदी कम हुआ निवेश, यह है सबसे बड़ी वजह

अप्रैल के मुकाबले मई के महीने गोल्‍ड ईटीएफ में करीब 57 फीसदी कम निवेश हुआ है। जिसका कारण शेयर बाजार में लगातार तेजी को बताया जा रहा है। बीते एक महीने में सेंसेक्‍स 6.44 फीसदी और 6 महीने में 13 फीसदी से ज्‍यादा का रिटर्न दे चुका है।

मई के महीने में Gold ETF में 57 फीसदी कम हुआ निवेश, यह है सबसे बड़ी वजह

गोल्ड में निवेश करना फायदेमंद माना जाता है। (Photo-Indian Express )

Gold ETF यानी Gold Exchange Traded Fund में अप्रैल के मुकाबले मई के महीने में 57 फीसदी कम निवेश हुआ है। यह आंकड़ा निवेशकों का इक्‍व‍िटी की ओर रुख करने के कारण आपको ETF में निवेश क्यों करना चाहिए कम हुआ है। एसोसिएशन ऑफ म्युचुअल फंड्स इन इंडिया के आंकड़ों की मानें तो गोल्ड ईटीएफ में निवेश कम होने के बाद भी एयूएम में 6 फीसदी की बढ़ोतरी देखने को मिली है। आइए आपको भी बताते हैं किे एम्‍फी की ओर से किस तरह के आंकड़ें सामने आए हैं।

एम्‍फी के आंकड़ों के अनुसार मई के महीने में गोल्‍ड ईटीएफ में निवेश में 57 फीसदी की गिरावट देखने को मिली है। जोकि 288 करोड़ रुपए रह गई है। जबकि अप्रैल आपको ETF में निवेश क्यों करना चाहिए में यह आंकड़ा 680 करोड़ रुपए देखने को मिला था। मार्च के महीने में गोल्‍ड ईटीएफ में 662 करोड़ रुपए , फरवरी में 491 करोड़ रुपए और जनवरी में 625 करोड़ रुपए देखने को मिला था। वहीं परिसंपत्‍ति‍यों की बात करें तो 6 फीसदी का इजाफा होकर 16,625 करोड़ रुपये पर पहुंच गईं है। जो अप्रैल में 15,629 करोड़ रुपए थीं।

गोल्ड ईटीएफ में क्‍यों कम हुआ निवेश : जानकारों की मानें तो मई के महीने में गोल्‍ड ईटीएफ में निवेश कम होने का मुख्‍य कारण निवेशकों का इक्‍व‍िटी की ओर रुख करना है। बीते एक महीने से शेयर बाजार में काफी अच्‍छी तेजी देखने को मिली है। जिसकी वजह से निवेशकों गोल्‍ड ईटीएफकी ओर से जाने की जगह इक्‍व‍िटी की ओर रुख कर दिया है। वहीं दूसरी ओर गोल्‍ड कीमत में उछाल आने के बारण निवेशकों ने मुनाफावसूली की है। जिसकी वजह से भी गोल्‍ड ईटीएफ के निवेशकों ने यहां निकल गए हैं।

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शेयर बाजार में जगरदस्‍त रिटर्न : पहले बात सेंसेक्‍स की करें तो बीते एक महीने में 6.44 फीसदी का रिटर्न देखने को मिला है। जबकि 6 महीनों की बात करें तो रिटर्न 13 फीससदी से ज्‍यादा पहुंच रहा है। वहीं निफ्टी में बीते एक महीने में 6.34 फीसदी की तेजी देखने को मिली है। जबक‍ि निफ्टी 50 ने बीते 6 महीने में करीब 16 फीसदी का रिटर्न दिया है। आपको बता दें क‍ि आज सेंसेक्‍स 52773.05 अंकों के साथ रिकॉर्ड लेवल पर बंद हुआ है। जबक‍ि निफ्टी 15869.25 अंकों के साथ रिकॉर्ड अंकों आपको ETF में निवेश क्यों करना चाहिए के साथ बंद हुआ है।

क्या है Gold ETF जिसमें जोरदार कमाई के लिए लोग जमकर कर रहे हैं निवेश? जानिए डिटेल्स

Gold ETF: सोना प्राचीन काल से निवेश का आकर्षक माध्यम रहा है। हालांकि, इसकी सुरक्षा की चिंता जरूर रहती है, इस चिंता को दूर करता है गोल्ड ईटीएफ। निवेश के लिए गोल्ड ईटीएफ (Gold ETF) एक बेहतर विकल्प हो.

क्या है Gold ETF जिसमें जोरदार कमाई के लिए लोग जमकर कर रहे हैं निवेश? जानिए डिटेल्स

Gold ETF: सोना प्राचीन काल से निवेश का आकर्षक माध्यम रहा है। हालांकि, इसकी सुरक्षा की चिंता जरूर रहती है, इस चिंता को दूर करता है गोल्ड ईटीएफ। निवेश के लिए गोल्ड ईटीएफ (Gold ETF) एक बेहतर विकल्प हो सकता है। एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (एम्फी) के आंकड़ों के मुताबिक, बढ़ती महंगाई और कोरोना महामारी में गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (गोल्ड ETF) लोगों को खूब भा रहा है। बीते साल यानी 2021 आपको ETF में निवेश क्यों करना चाहिए में गोल्ड ईटीएफ को 4,814 करोड़ रुपये का निवेश मिला है। आइए गोल्ड ईटीएफ से जुड़ी बातों को विस्तार से समझते हैं--

क्या है गोल्ड ईटीएफ
सोने को शेयरों की तरह खरीदने की सुविधा को गोल्ड ईटीएफ कहते हैं। यह म्यूचुअल फंड (Mutual Fund) की स्कीम है। इसमें सोने की खरीद यूनिट में की जाती है। इसे बेचने पर आपको सोना नहीं बल्कि उस समय के बाजार मूल्य के बराबर राशि मिलती है। यह सोने में निवेश के सबसे सस्ते विकल्पों में से एक है। इसकी खरीद यूनिट में की जाती है। आमतौर पर ईटीएफ के लिए डीमैट खाता जरूरी होता है।

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50 रुपये से निवेश शुरू कर सकते हैं निवेश
एक्सपर्ट के अनुसार, 'गोल्ड में निवेश करने के लिए ढेर सारे विकल्प मौजूद हैं। गोल्ड ईटीएफ उनमें से एक सरलतम विकल्प है। पिछ्ले कुछ सालों में निवेशकों ने गोल्ड ईटीएफ को बहुत तरजीह दी है।' गोल्ड ईटीएफ में निवेश करने से आपको नकली सोना खरीदने का डर समाप्त हो जाता है। साथ इसके रख-रखाव का भी डर समाप्त हो जाता है। नितिन कहते हैं, 'गोल्ड ईटीएफ में 50 रुपये से निवेश शुरू किया जा सकता है। साथ ही इसे कभी भी खरीद और बेच सकते हैं।'

गोल्ड ईटीएफ के फायदे
इसमें निवेशक जितनी चाहें उतनी चाहें उतनी यूनिट खरीद सकते हैं, एक कारोबारी दिन में निवेशकों को अलग-अलग वैल्यू मिलती है और वो किसी भी तरह का ट्रांजेक्शन कर सकते हैं। इसके जरिये निवेशक इंट्राडे मूवमेंट में भी पैसा कमा सकते हैं। निवेशकों को सोने को सुरक्षित रखने के जोखिम की चिंता नहीं रहती। इसमें सोने को खरीदने की तरह कई अन्य तरह के चार्ज नहीं होते। इसमें निवेशक अपनी सहूलियत के अनुसार एंट्री और एक्जिट ले पाता है तो फिजिकल गोल्ड में नहीं हो पाता है।

क्या कहते हैं आंकड़ें?
क्वांटम म्यूचुअल फंड के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) जिमी पटेल ने कहा कि महंगाई और फेडरल रिजर्व के रुख की वजह से 2022 में भी गोल्ड ईटीएफ का आकर्षण कायम रहने की उम्मीद है। उन्होंने कहा, ‘‘हालांकि, अमेरिकी केंद्रीय बैंक द्वारा मौद्रिक नीति को कड़ा करने से डॉलर और अमेरिका में बांड पर प्रतिफल बढ़ेगा, जो सोने के लिए बाधक हो सकता है।’’ पटेल ने कहा कि 2020 में गोल्ड ईटीएफ में निवेश का प्रवाह बढ़ने की प्रमुख वजह कोविड-19 महामारी थी। इसके अलावा मौद्रिक रुख में नरमी और वैश्विक स्तर पर ब्याज दरों में कमी से भी सोने में निवेश फायदे का सौदा था।

मॉर्निंगस्टार इंडिया के एसोसिएट निदेशक-प्रबंधक शोध हिमांशु श्रीवास्तव ने कहा कि गोल्ड ईटीएफ पूरे साल निवेशकों को आकर्षित करता रहा। यहां तक कि शेयरों में उछाल के बावजूद इसका आकर्षण कायम रहा। बीते साल सिर्फ जुलाई महीने में गोल्ड ईटीएफ से निकासी देखने को मिली। जुलाई में निवेशकों ने गोल्ड ईटीएफ से 61.5 करोड़ रुपये निकाले। निवेश के प्रवाह के बीच दिसंबर, 2021 तक स्वर्ण कोषों के प्रबंधन के तहत परिसंपत्तियां 30 प्रतिशत बढ़कर 18,405 करोड़ रुपये पर पहुंच गईं, जो एक साल पहले 14,174 करोड़ रुपये पर थीं।

Mutual Funds SIP : एक साथ कितने एसआईपी चलाये जाने चाहिए? – हर्षद चेतनवाला

लेकिन यहाँ आपको ये ध्यान रखना होगा कि आप एक योजना में आपको ETF में निवेश क्यों करना चाहिए छह बार पैसे डाल रहे हैं या छह अलग-अलग योजनाओं में आपने एसआईपी की है। इस अंतर को और गहरायी से समझने के लिये जरूर देखें माईवेल्थग्रोथ.कॉम के सह संस्थापक हर्षद चेतनवाला के साथ निवेश मंथन के संपादक राजीव रंजन झा की ये बातचीत।

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